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Sunday, May 3, 2020

प्रवासियों को घर भेजने के लिए शुरू हुआ जन सहायक एप रविवार को हुआ बंद, पैदल ही पलायन को मजबूर

प्रवासी मजदूरों को गांव भेजने के लिए सरकार द्वारा शुरू किया गया जन सहायक एप रविवार को ही बंद हो गया। इसे मजदूरों के लिए दो दिन पहले ही शुरू किया गया था। ऐसे में यूपी, बिहार, राजस्थान व मध्यप्रदेश जाने वाले श्रमिक दर-दर भटकने के लिए मजबूर हैं। फरीदाबाद के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को उनके ठेकेदारों और सरकारी तंत्र ने उनके हाल पर छोड़ रखा है। हैरानी की बात यह है कि दिन और रात में सिर पर सामान लादे फरीदाबाद से अपने बच्चों व महिलाओं के साथ पलायन करने वाले ये मजदूर सरकारी अधिकारियों को दिखाई नहीं देते। या फिर देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। यहां तक कि बैरिकेड और नाका लगाकर जगह-जगह बैठे पुलिसकर्मी भी इन्हें रोककर उनकी हेल्प कराने का प्रयास नहीं करते। यही कारण है कि पैदल पलायन करने वालों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
सरकारों ने आपस में बात कर मजदूरों को भेजने की बनाई है योजना
विभिन्न राज्य सरकारों ने आपस में बातचीत करके हरियाणा में फंसे यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मजदूरों को उनके गांव वापस लाने की घोषणा की है। उन्हें बसों से लाने की कोशिशें की जा रही हैं। इसी आधार पर हरियाणा सरकार ने भी ऐसे प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए प्रयास शुरू किया है लेकिन अभी तक प्रयास धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। हरियाणा सरकार ने दो दिन पहले जनसहायक एप लांच किया है। इसमें गांव जाने वाले मजदूरों का पंजीकरण कर उन्हें भेजने की व्यवस्था करने की बात कही गई है। लेकिन ये एप रविवार को ही बंद हो गया। पूरे दिन एप चालू ही नहीं हा़े पाया।

सामान व बच्चों को लेकर पलायन कर रहे श्रमिक

सरकारी तंत्र की बदहाली के कारण यहां रहने वाले प्रवासी मजदूर सुबह से लेकर शाम तक सिर पर सामान रखे और बच्चों को कंधे पर बैठाए गांव की ओर पलायन कर रहे हैं। रविवार दोपहर को अजरौंदा मेट्रो स्टेशन के नीचे आराम कर रहे मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला निवासी श्रमिक छोटेलाल, राजेश, लव व सोनू ने बताया कि वह एनआईटी पांच में आईटीआई के पास काम करते थे। ठेकेदार और उसके मुंशी सुरेंद्र ने कोई मदद नहीं की। जो पैसा चार महीने में कमाया था वह राशन पानी में खत्म हो गया। अब खाने के लिए एक पैसे नहीं हैं। मजबूरी में उन्हें पैदल अपने गांव जाना पड़ रहा है। उनका यह भी आरोप है कि एक सप्ताह पहले उन्होंने पुलिस से भी मदद मांगी थी लेकिन पुलिस ने भी कोई मदद नहीं की।

कंट्रोल रूम में दो दिन में करीब 200 कॉल आईं | कंट्रोल रूम के कोआर्डिनेटर डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि दो दिन में गांव जाने के लिए करीब 150 से 200 कॉल आ चुकी हैं। इनमें अधिकांश यूपी और बिहार के लोग हैं। उनकी मांग है कि सरकार उन्हें गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था करे। एमपी सिंह ने बताया कि जो भी कॉल आ रही हैं उनकी पूरी डिटेल नोट कर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। अंतिम फैसला प्रशासन को लेना है। उन्होंने बताया इसके लिए एसडीएम बड़खल पंकज कुमार सेतिया को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।



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Jan Sahayak app to send migrants home closed on Sunday, forced to flee on foot


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