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Wednesday, May 6, 2020

लॉकडाउन में काम छूटने पर सब्जी बेचनी शुरू की, पुलिस ने परेशान किया तो फांसी लगाकर दी जान

(नीरज आर्या)देश में लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार दिहाड़ी मजदूरों पर ही पड़ी है। काम बंद हो जाने पर एक शख्स ज्यादा दिनों तक अपने घर नहीं बैठ सका। चार बच्चे, पत्नी और बुजुर्ग पिता का खर्च उठाने की जिम्मेदारी उसी के कंधे पर थी। लिहाजा, उसने दोस्त की सलाह पर रेहड़ी लगाकर सब्जी बेचने का काम शुरु कर दिया। इस काम का कोई अनुभव नहीं था, फिर भी परिवार का पेट भरने के लिए वह मेहनत करने से पीछे नहीं हटा। लेकिन पुलिस ने सोशल डिस्टेसिंग की वजह से उसे सब्जी भी नहीं बेचने दी और परेशान करने लगी। आखिरकार, तंग आकर उसने मंगलवार दोपहर घर में गमछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। लॉकडाउन, गरीबी और मजबूरी की यह दर्दनाक घटना सागरपुर इलाके की है। इस मजदूर के परिवार की माली हालत का अंदाजा इसी से लग जाता है कि उसका अंतिम संस्कार भी फौजी दोस्त ने छह हजार रुपए खर्च कर कराया।
साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक में डाबड़ी एक्सटेंशन गली नंबर दो में हरिशरण (40) परिवार के साथ रहता था। यहां करीब दो साल से वह किराए के मकान में बुुजुर्ग पिता, पत्नी, और चार बच्चों के साथ रहता था। बच्चों में चौदह साल की बड़ी बेटी और छोटे तीनों बेटे हैं। हरिशरण मूलरुप से छपरा बिहार कार रहने वाला था। वह दिहाड़ी मजदूर था। उसका परिवार प्रतिदिन मिलने वाले काम से होने वाली कमाई से चलता था। 24 मार्च से पूरा देश लॉकडाउन हो गया। जिस कारण उसका काम छूट गया। कई दिनों तक वह घर में ही रहा। परिवार का खर्चा ज्यादा था और कमाई उसकी शून्य हो चुकी थी। वही अकेला कमाने वाला था। उसकी चिंताएं बढ़ने लगीं। ग्रॉसरी शॉप और सब्जी बेचने वाले लोगों को लॉकडाउन के पहले चरण से ही छूट मिली हुई थी। लिहाजा, उसके एक रिटायर फौजी दोस्त ने सलाह दी कि वह घर में बैठने के बजाए सब्जी बेचना शुरु कर दे।



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