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Monday, May 11, 2020

कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों में कोरोना के गंभीर मरीजों की भर्ती नहीं

(शेखर घोष)राजधानी में कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था में भारी लापरवाही और अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। मरीजों के परिजन आ आरोप है कि अस्पतालों में डॉक्टर नियमों का हवाला देकर भर्ती नहीं करते। दिल्ली सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए कोविड और नॉन कोविड अस्पताल तय किए हैं। गंभीर कोरोना संक्रमित मरीज इलाज के लिए कोविड से नॉन कोविड अस्पतालों में भटकते रहते हैं।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के गंभीर मरीजों को तुरंत भर्ती कर उपचार के लिए कोविड या नॉन कोविड अस्पतालों को कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। कोविड अस्पताल मरीज को भर्ती कर उसका इलाज तब तक शुरू नहीं करते, जब तक कोरोना रिपोर्ट में पॉजिटिव नहीं आती। इसी तरह नॉन कोविड अस्पताल तक तक भर्ती नहीं करते, जब तक मरीज का कोरोना टेस्ट निगेटिव नहीं आ जाए। कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट आने में डाॅक्टरों के अनुसार 36-48 घंटे लगते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार अगर गंभीर कोरोना संक्रमित डायबिटीज, रक्तचाप, फेफड़े या दिल की क्रोनिकल बीमारी से ग्रस्त हो, वह नाबालिग या बुजुर्ग हो तो उसकी मौत का खतरा अधिक हो जाता है। अरुणा अासफ अली अस्पताल के एमएस डॉ. सुशांत सिन्हा कहते हैं कि हमारा नॉन कोविड अस्पताल है। हमारे यहां कोरोना के सीरियस या नार्मल किसी मरीज के इलाज की व्यवस्था नहीं है। जगप्रवेश चन्द्रा अस्पताल के एमएस डाॅ. आदर्श कुमार कहते हैं, हमारा अस्पताल नॉन कोविड है। गंभीर मरीजों के उपचार की व्यवथा हमारे यहां नहीं है। हमारे यहां सैंपलिंग की व्यवथा है। हम सैंपल लेकर रिपोर्ट देखते हैं, रिपोर्ट पॉजिविट आने के बाद हम रिपोर्ट के साथ एलएनजेपी या राजीव गांधी भेज देते है। व्यवथा नार्मल आने पर भर्ती कर उपचार शुरू कर देते हैं।

कोविड अस्पताल एनएनजेपी के एमएस ने बात करने से मना कर दिया। इस मामले में कोविड सेल के इंचार्ज डाॅ. जेडएसके मारक के मोबाइल पर बात की तो उनके विभाग के लोगों ने बताया कि उन्होंने अपना मोबाइल स्विच ऑॅफ कर दिया है। इसके बाद उनके कायार्लय के नंबर पर उनका पक्ष लेने के लिए कॉल किया, जिस पर घंटी जाती रही लेकिन उठा नहीं। दूसरी तरफ डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेस की डायरेक्टर डाॅ. नूतन मुंडेला के फोन कई बार कॉल किया। एसएमस से भी मामले को लिखकर उनका पक्ष मांगा पर उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया।

अस्पताल बोले...

कोविड के लिए गाइडलाइन है कि कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद ही इलाज किया जाए। इसलिए हम पहले टेस्ट करवाते हैं और पॉजिटिव आने के बाद ही भर्ती करते हैं। पहले अगर को भर्ती कर लिया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो अन्य लोगों के काेरोना संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
- डॉ. बीएल शेरवाल, एमएस, राजीव गांधी अस्पताल

हमारा अस्पताल नॉन कोविड है। हम कोरोना के गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं करते, उन्हें कोविड अस्पताल में भेज देते हैं। कोरोना संदिग्धों को भर्ती किया और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इस बीच डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ को कोरोना संक्रमण होने की आशंका रहती है।
- डाॅ. अनिल सैनी, एमएस, बाबू जगजीवन राम अस्पताल

एक्सपर्ट राय...

अन्य देशों में कोरोना की टेस्ट रिपोर्ट 4 घंटे में आ जाती है। दिल्ली में कोरोना के मामले इतने हैं कि सैंपल लेने के दो दिन बाद दिल्ली सरकार टेस्ट रिपोर्ट लगा रही है। सरकार को चाहिए कि गंभीर मरीजों के लिए सभी अस्पतालों में अलग से रूम बनाए। इलाज शुरू करते हुए सैंपल लेकर इमरजेंसी में जांच कर 4 घंटे में टेस्ट कराए।
- डा. केके अग्रवाल, अध्यक्ष, ऑल इंडिया मेडिकल एसोशिएसन



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No serious corona patients admitted to Kovid and non-Kovid hospitals


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