दिल्ली में लॉकडाउन के दो महीने पूरे हो गए। इसके शुरुआती तीन चरण में आम लोगों के लिए सड़क पर चलने पर पाबंदी थी। इस दौरान दिल्ली में अपराध नियंत्रण के लिए तैनात दिल्ली पुलिस की पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) की वाहन गर्भवती महिलाओं के लिए देवदूत की भूमिका निभाई। लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट वाहनों के चलने पर लगी पाबंदी के समय दिल्ली पुलिस ने संकट के समय आम लोगों ने पुलिस क मदद ली। लोगों के इमरजेंसी के दौरान पीसीआर में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने पीसीआर का एम्बुलेंस के तरह प्रयोग करते हुए किया।
लॉकडाउन के दौरान जहां से भी मदद के लिए कॉल आई कॉल करने के वाले के मकसद और स्थिति की प्राथमिकता देते हुए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं को प्रसव से लेकर कई बीमार व्यक्तियों को भी अस्पताल तक छोड़ा। दिल्ली पुलिस के अधिकारी के अनुसार दो महीने में पीसीआर स्टाफ ने 972 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचया। लगभग सभी केस में समय पर अस्पताल पहुंच जाने पर महिला की डिलीवरी आसानी से हो गई।
डीसीपी पुलिस कंट्रोल रुम शरत कुमार सिन्हा ने बताया दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रह हैं। बेशक चौथे लॉकडाउन में सरकार ने कुछ नियमों में रियायत दी है, लेकिन फिर भी लोग पुलिस से अब भी मदद मांग रहे हैं। मानवीयता के नाते ऐसी कोई कॉल आने पर हम भी लोगों क मदद करने से पीछे नहीं हट रहे। चौबीस घंटे के भीतर अलग अलग जगह से आई कॉल को अटेंड कर पुलिस कर्मियों ने दो गर्भवती महिलाओं को अलग अलग अस्पताल में भर्ती कराया।
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