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Monday, May 11, 2020

खारी बावली में बदला बिजनेस पैटर्न; टेलीफोन, वॉट्सएप, ईमेल पर होगा 80 फीसदी व्यापार

(अखिलेश कुमार)लॉकडाउन के 48 दिन में कई बिजनेस एकदम बंद हैं तो आवश्यक वस्तुओं से जुड़े बिजनेस चालू होने पर भी 20-25% पर आ गए हैं। लेकिन इसबीच सुखद खबर यह है कि देश के सबसे बड़े किराना मार्केट खारी बावली के व्यापारियों को बिजनेस पैटर्न में बदलाव के बावजूद व्यापार के बढ़ने की उम्मीद है। भास्कर ने पहले ट्रांसपोर्ट सेक्टर का हाल जाना जिसमें सामने आया कि बिजनेस पटरी पर आने में डेढ़ से दो साल लगेंगे।

इसी कड़ी में सोमवार को देश के सबसे बड़े किराना मार्केट खारी बावली के व्यापारियों ने बताया जहां पहले 80% व्यापार यहां लोग आकर करते थे और 20% टेलीफोन या वाट्सएप मैसेज पर होता था, वहीं अब 80% बिजनेस फोन, वाट्सएप मैसेज, ईमेल पर हो गया है। माल भी दुकान पर लाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। सीधे गोदाम या कोल्ड स्टोरेज से ऑर्डर देने वाले के पास जा रहा है।
इससे लेबर व ढुलाई वाहन खर्च बच रहा है जिसका फायदा दुकानदार और ग्राहक को होगा।दिल्ली किराना कमेटी खारी बावली के प्रधान विजय गुप्ता ने भास्कर ने बताया कि यहां 2000 से अधिक व्यापारी हैं। जिनका सालाना करोबार 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच दुकान 80% बंद हैं लेकिन बिजनेस में अब दो-चार दिन से चढ़ाव आने लगा है। सुबह 7 बजे से शाम को 7 बजे तक जो दुकानदार बैठने लगे, उनके पास ऑर्डर भी आने लगा है।

मोबाइल-इंटरनेट पर बाजार आने लगा है जो महामारी के डर से अभी और बढ़ेगा।भास्कर ने पूछा कि लॉकडाउन से बिजनेस कितने दिन में पटरी पर आएगा और कितना घटेगा या बढ़ेगा? इस पर विजय गुप्ता ने कहा कि बिजनेस पटरी पर आने लगा है। लेकिन अभी ग्राहक व व्यापारी दोनों के मन में डर है। वो बाजार नहीं आ रहे हैं। ग्राहक मोबाइल-इंटरनेट पर ऑर्डर कर रहा है जिसका माल अब खारी बावली आने की बजाय सीधे उन दुकानदारों के पास पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में लोग छोटा-मोटा काम शुरू करेंगे तो एक-दो साल में महानगरों में बिजनेस की स्थित बदल जाएगी। अब पुराने नेचर में बिजनेस बहुत कम होगा।
समस्या: व्यापारियों को सताने लगी है मजदूरों के वापस नहीं आने की चिंता
दिल्ली किराना कमेटी के प्रधान विजय गुप्ता, खारी बावली सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजीव बत्रा, दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन नया बाजार के अध्यक्ष नरेश गुप्ता ने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत मजदूरों की है। बाजार में पहले गाड़ी और मजदूर बहुत थे जो अब 15-25 फीसदी तक रह गए हैं। अब ट्रेन चलने और इंटरस्टेट श्रमिक स्पेशन चलाए जाने से बाकी बड़ी संख्या चली जाएगी। अभी दिल्ली देश में तीसरे नंबर पर महामारी के आंकड़ों के हिसाब से पहुंची है। ऐसे में अगले 6 महीने में 50 फीसदी आ जाएं, यही गनीमत है।

इधर, दिल्ली के नया बाजार स्थित अनाज मंडी में 300 से अधिक दुकान है। लेकिन गिनती की दुकान खुल रही है। दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के प्रधान नरेश गुप्ता ने भास्कर से कहा कि दिल्ली व दिल्ली के बाहर भी यहां से व्यापार होता है। व्यापारी जान जोखिम में डालकर सप्लाई बना रहा है। लेकिन केंद्र व राज्य सरकार आयकर, टीडीएस, मार्केट में साफ-सफाई व सैनिटाइजेशन पर ध्यान नहीं रही है। मध्यम व्यापारी टूट रहा है। तनख्वाह कर्मचारियों को देनी पड़ रही है और काम नहीं हो रहा है। एक चौथाई बिजनेस रह गया है। जीटी करनाल रोड पर ज्यादातर गोदाम हैं, टेलीफोन पर ऑर्डर भी अभी कम आ रहे हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद बिजनेस ट्रैक पर आने में कम से कम तीन महीने लगेंगे।

फायदा: ढुलाई में गाड़ी का भाड़ा और मजदूर खर्च बच रहा है, ग्राहक को होगा लाभ

दिल्ली किराना कमेटी के प्रधान विजय गुप्ता ने बताया कि महामारी के कारण बिजनेस घटेगा नहीं, बल्कि बढ़ेगा। माल ढुलाई, लोडिंग-अनलोडिंग में मजदूर और सामान पहले दुकान पर लाने और फिर दोबारा वाहन में लोड करने के दौरान घटने वाला माल भी बचेगा। जो व्यापारी की लागत बचेगी उसका फायदा फायदा रिटेल दुकानदार और ग्राहकों को मिलेगा। अब कोल्ड स्टोरेज और गोदाम से सीधे रिटेलर के पास माल जा रहा है। इसकी वजह से बाजार में वाहनों की भीड़ भी घटेगी। आखिर जब कोई माल देखने बाजार में नहीं आएगा तो सामान गलत निकलने का डर नहीं रहेगा?

इसके जवाब में विजय गुप्ता ने कहा, एक बार सामान जिसका गलत निकलेगा, अगले बार दुकानदार उससे सामान नहीं मंगाएगा तो विश्वास का बिजनेस करने वालों का बिजनेस बढ़ेगा। किराना में मसाले, ड्राइफ्रूट्स, अाटा, सूजी और मैदा व अन्य प्रोडक्ट आते हैं।
बदलाव: सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आएंगे बदलाव, यहां दाल-चावल को छोड़ बाकी दुकानें नहीं खुलीं

खारी बावली सर्व व्यापार मंडल, खारी बावली के अध्यक्ष राजीव बत्रा कहते हैं कि दाल-चावल छोड़कर यहां के बाकी दुकानें नहीं खुल पाईं। अगर दुकान खोल भी दें तो कस्टमर नहीं हैं। नाकेबंदी में लोग नहीं आ पाते और ट्रांसपोर्ट की भी दिक्कत है। बिजनेस ट्रैक पर आने में तीन-चार महीने लगेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बिजनेस शुरू होगा। अगर मामले बढ़ गए तो फिर लॉकडाउन का फैसला ना आ जाए। घी और जड़ी बूटी का व्यापार करने वाले राजीव बत्रा कहते हैं कि मैं लॉकडाउन के बाद से दुकान पर नहीं गया।



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खारी बावली में दुकानों को सेनिटाइज किया गया।


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