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Monday, May 25, 2020

1.48 लाख प्रवासियों ने घर जाने को कराया रजिस्ट्रेशन, भेजे गए 22 हजार, 40% खुद गए

(भोला पांडेय)लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद होने से परेशान हजारों प्रवासी घर जाने को उतावले हैं लेकिन उनके जाने की व्यवस्था नहीं हो रही है। यहां तक कि रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली 100 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भी कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है। यहां रहने वाले प्रवासी आरक्षण केंद्रों पर सुबह 5 बजे से ही लाइन में लग जाते हैं फिर भी निराशा ही हाथ लग रही है। सरकार और जिला प्रशासन बड़ी संख्या में प्रवासियों को अपने खर्च पर बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश भेजने का दावा कर रहे हैं लेकिन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने और भेजे जाने वालों की संख्या के अंतर को देखकर हकीकत सामने आ जाती है।

सूत्रों की मानें तो सरल हरियाणा पोर्टल पर फरीदाबाद में देश के विभिन्न राज्यों के करीब 1.48 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। जबकि प्रशासन रोडवेज और ट्रेनों से अभी तक महज 22 हजार प्रवासियों को ही उनके गंतव्य तक पहुंचा पाया है। 40 फीसदी लोग खुद पैदल व अन्य साधनों से पहुंच गए। बाकी बचे लोग अपने पैसे खर्च कर ट्रेन का कंफर्म टिकट लेने के लिए भटक रहे हैं।

रोडवेज से भेजे गए यात्री

जीएम रोडवेज राजीव नागपाल का कहना है कि उन्होंने अभी तक यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश के प्रवासियों को भेजने के लिए बसें उपलब्ध कराई थीं। उन्होंने बताया हरियाणा रोडवेज से करीब 8000 लोगांे को यूपी, 1000 लोगोंको राजस्थान और 600 लोगों को ग्वालियर तक भेजा गया है। यानि करीब 9600 लोगों को भेजा जा चुका है। और भी जहां भेजने का आदेश मिलेगा बसें भेजी जाएंगी।

ट्रेनों से भेजेगए यात्री
ट्रेन से भेजने वाले प्रवासियों की बात करें तो प्रशासन ने सरकार के खर्च पर अब तक छह ट्रेनों से यात्रियों को बिहार और मध्य प्रदेश भेजा भेजा है। 12 मई को 1192 यात्रियों को मध्यप्रदेश के दमोह जिला भेजा गया था। 15 मई को दो ट्रेनों से करीब 3000 यात्रियों को कटिहार और बरौनी, 20 मई को करीब 1400 यात्रियों को भागलपुर, 21 मई को बरौनी के लिए 1400 यात्री और 25 मई को 1600 यात्रियांे को कटिहार के लिए भेजा गया। अर्थात अब तक 8592 यात्रियाें को बिहार और एमपी पहुंचाया जा चुका है।

अधिकारी बोले अधिकांश लोग अब नहीं जाना चाहते

जिला सूचना अधिकारी मुनीष गुप्ता का कहना है कि प्रशासन अभी तक 22 हजार से अधिक प्रवासियों को घर पहुंचा चुका है। 35 से 40 फीसदी लोग ऐसे हैं जो पंजीकरण कराने के बाद बगैर इंतजार किए खुद घर पहुंच गए। जब पंजीकरण कराने वालों को फोन किया जाता है तो अधिकांश लोगों का कुछ अता-पता नहीं चलता। बाकी बचे करीब 30 से 35 फीसदी लोग अब घर नहीं जाना चाहते। क्योंकि धीरेे-धीरे कंपनियां और मार्केट खुल रही हैं। लोगों को काम धंधा भी मिल रहा।

प्रवासी बोले, पैसे खर्च करने पर भी घर नहीं पहुंच पा रहे

बल्लभगढ़ आरक्षण केंद्र पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए टिकट कराने आए बिहार के छपरा निवासी वशिष्ठ दुबे और उड़ीसा निवासी पीतांबर दास ने बताया कि दो महीने से काम धंधा बंद है। घर जाने के लिए पहले सरल पोर्टल पर पंजीकरण कराया। वहां से आजकल की डेट ही मिल रही है। अब अपने पैसा खर्च कर सुबह 5 बजे से लाइन में टिकट कराने के लिए खड़े रहे लेकिन किसी भी ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल रही है। सरकार और प्रशासन से कोई सुविधा नहीं मिल रही।



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फरीदाबाद. बल्लभगढ़ रेलवे आरक्षण केंद्र पर लगी टिकट कराने वालों की भीड़।


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