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Tuesday, May 12, 2020

मजदूर साइकिल से तय कर रहे 1200 किमी. की दूरी, परिजन फोन पर बोले-कैसे भी घर आ जाओ

(अखिलेश कुमार)लॉकडाउन 3.0 खत्म होने में अभी 4 दिन शेष हैं। लेकिन प्रवासी मजदूरों का सब्र जवाब दे रहा है। कोई रात में पैदल चलकर बॉर्डर क्राॅस करने के लिए पहुंचा तो कोई तड़के 3 बजे साइकिल पर 1000-1200 किमी का सफर करके घर पहुंचने को पसीना बहा रहा है। कुछ ने कहा, 3 घंटे कटोरा लेकर लाइन लगने पर पेटभर खाना नहीं मिलता और कई बार तो मिलता ही नहीं है। अब इस जलालत को झेलने के लिए दिल्ली में नहीं रुक सकते। पैसे बचे नहीं हैं। मम्मी-पापा फोन करके करके कह रहे हैं, बेटा कैसे भी आ जाओ।
एक मजदूर ने तो बिहार जाने के लिए निकलने के पहले रास्ते में खाने का बंदोबस्त हो सके इसलिए अपना मोबाइल बेच दिया। चूड़ा-मूरी खरीदकर बैग में रखा और साइकिल लेकर एक ग्रुप में निकल पड़ा। भास्कर ने बुधवार को दिल्ली-यूपी के अप्सरा बॉर्डर, वैशाली बॉर्डर और यूपी गेट-गाजीपुर बॉर्डर पर मजदूरों के बॉर्डर पार करने के संघर्ष पर उनसे बात की। इधर, दक्षिण पश्चिम जिला के द्वारका स्थित एलएंडटी के निर्माण साइट से 2200 मजदूर अपने घर लौटेंगे। डीएम के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दो महीने की सैलेरी मिलेगी। बुधवार को इनमें से 800 मजदूरों को ट्रेन से बिहार भेजा गया। डीएम राहुल सिंह ने बताया कि करीब 2200 मजदूर हैं।
9 बजे लाइन लगाओ तो 12 बजे खाना मिलता है
यूपी के राय बरेली निवासी और दिल्ली के नरेला में रहने वाले मनीष कुमार साथियों के साथ साइकिल पर ही राय बरेली जाने के लिए निकले हैं। मनीष ने कहा पैसे जेब में नहीं हैं, कहां से खाएंगे। जहां मैं रहता हूं, वहां से दो किमी दूर स्कूल है। वहां खाना मिलता था। सुबह 9 बजे लाइन लगाओगे, 12 बजे खाना मिलेगा।
हमने सोचा, अब गांव चलो नहीं तो मर जाएंगे
बिहार के बांका जिला निवासी देवन कुमार दिल्ली के सोनिया विहार में रहते थे। मंगलवार को अप्सरा बॉर्डर से यूपी में साइकिल से प्रवेश करने के लिए साइकिल उल्टी दिशा में मोड़कर सोच रहे थे। पूछने पर बोले-10 दिन से चूड़ा-मूरी खाकर जी रहा था हमने सोचा अब गांव चलो, नहीं तो यहां मर जाएंगे।
तीन बच्चों के साथ फुटपाथ पर खाली पेट सोए
यूपी के लखीमपुर निवासी नमी तीन बेटे और पत्नी आसमां के साथ वैशाली बॉर्डर के पास फुटपाथ पर बैठे मिले। उन्होंने बताया कि सदर मार्केट में लकड़ी का खिलौना बनाते थे। काम बंद हो गया। सोमवार रात को निकले थे। बॉर्डर तक पहुंचने में रात हो गई। खाना नहीं था तो फुटपाथ पर भूखे पेट सो गए।
रात हमने थाने और शेल्टर होम में गुजारी
यूपी के रहने वाले दो साथी नीरज और श्रीकेश आनंद विहार रोड के फुटपाथ पर बैठकर पॉलीथिन में रखी भिंडी की सब्जी और रोटी खा रहे थे। पूछने पर बोले-हमारे घर में दादी अकेली हैं। सोचा था मार्च में जाऊंगा लेकिन जब तक फैक्ट्री से पैसे मिले, लॉकडाउन हो गया। कभी 15 दिन, कभी 21 दिन करके बढ़ा रहे हैं। कैसे रहेंगे।



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दिल्ली में मंगलवार को घर जाने के लिए निकले प्रवासी मजदूर।


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