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Saturday, May 9, 2020

क्षमता का 10-15% चल रहा ट्रांसपोर्ट सेक्टर, पटरी पर आने में लगेंगे 2 साल

(अखिलेश कुमार)दिल्ली सहित देशभर में लॉकडाउन-3 चल रहा है जो वर्तमान आदेश से 17 मई तक है। ऐसे में अगर 17 मई के बाद लॉकडाउन ना बढ़ाया जाए तो भी किसी बिजनेस सेक्टर को पटरी पर आने में कितना टाइम लगेगा। इस पर भास्कर ने ट्रांसपाोर्ट सेक्टर पर एक्सपर्ट, माल वाहन, बस ऑपरेटर्स और ऑटो टैक्स की एपैक्स संस्थाओं से बात करके जाना तो सामने आया कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर तमाम छूट के बावजूद अभी क्षमता के 10-15% पर ही चल रहा है। ऐसे में पुरानी स्थिति में आने या पटरी पर लौटने में डेढ़ से दो साल लगेंगे। लोन और अन्य खर्च के बोझ से छोटे ट्रांसपोटर्स जो 20-25 फीसदी हैं, वो टूट जाएंगे। लोन पर ली गई गाड़ियां उठनी शुरू होंंगी तो मध्यम वर्ग के लोग भी आसानी से लॉकडाउन की मार नहीं झेल पाएंगे। यही वजह है कि गुड्स व्हीकल, बस, ऑटो-टैक्सी के ऑपरेटर्स सरकार ने अलग-अलग तरह की राहत और पैकेज की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली कांट्रैक्ट बस एसोसिएशन के महासचिव और ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के चेयरमैन (फाइनेंस) डॉ. हरीश सभरवाल का कहना है कि सरकार ने ढील देने के नाम पर धोखा दिया है। ड्राइवर-कंडक्टर बुलाने को कहा कि आपूर्ति की दिक्कत ना हो लेकिन कोरोना योद्धा डॉक्टर, पुलिस व सफाई कर्मचारी की तरह मानकर बीमा देने को तैयार नहीं। इससे कंडक्टर ड्राइवर जो चले गए वो नहीं आ रहे हैं। पहले टोल टैक्स खत्म किया तो हमें एक तरफ से खाली ट्रक लाने में नुकसान ज्यादा नहीं था। 20 अप्रैल को 20 फीसदी बढ़ाकर टोल लेना शुरू कर दिया जिससे लोगों ने गाड़ी खड़ी करने में फायदा समझ रहे हैं और सड़क पर 30% माल वाहन भी नहीं आए। परिवहन मंत्री और वित्तमंत्री के साथ बैठकों में राहत की बात कही गई लेकिन नहीं मिली। ड्राइवर-कंडक्टर सब्जी बेच रहे हैं।

बड़ी समस्या : लॉकडाउन खुलने के बाद कंडक्टर और ड्राइवर अपने घर जरूर जाएंगे
दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन राजिंदर कपूर कहते हैं कि 2020 में तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर पटरी पर नहीं लौट पाएगा। व्यापारियों का काम खुलेगा तभी ट्रांसपोटर्स का काम चलेगा। अभी माल वाहन 24 घंटे चल सकता है लेकिन शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक लोडिंग व अनलोडिंग में मनाही है। फिर कंडक्टर-ड्राइवर को वापसी भेजने या लौटने के लिए केंद्र व राज्य सरकार व्यवस्था नहीं कर रही है। अभी नहीं गए तो लॉकडाउन खुलते चले जाएंगे चाहे कोई कितना भी पैसा दे दे। फिर काम कैसे होगा? लाइसेंस को ई-पास मान लेंगे लेकिन रेलगाड़ी या लंबी दूरी की बस नहीं चल रही है तो फिर आएंगे कैसे? जब हमारे वाहन नहीं चल रहे हैं तो उतने दिन का बीमा, फिटनेस, रोड टैक्स का पैसा माफ करना चाहिए। ऑटो टैक्सी की ज्वाइंट फ्रंट ने कहा- राहत पैकेज जरूरी। लोन किस्त और घर का खर्च निकालना होगा

कंडक्टर-ड्राइवर को वेतन कैसे या कितना दें, इस पर दो दिन में फैसला
दिल्ली कांट्रैक्ट बस एसोसिएशन के महासचिव और ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के चेयरमैन (फाइनेंस) डॉ. हरीश सभरवाल का कहना है कि बसें टूरिस्ट सर्विस को छोड़ दें तो स्कूल, दफ्तर में कांट्रैक्ट पर होती हैं। ऐसे में अगर स्कूल या दफ्तर हमें भुगतान नहीं करेगा तो कंडक्टर-ड्राइवर को बंद धंधे के बीच में भुगतान कैसे करेंगे। इस मसले पर रविवार या सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस से दिल्ली-यूपी व हरियाणा के बस ऑपरेटर्स की बैठक है। मार्च तक का वेतन दिया है, अब अप्रैल का देना है या नहीं इस पर फैसला होगा। पुरानी पोजिशन में इंडस्ट्री नहीं आएगी। 25% बंद होगा, 25 फीसदी सक्षम हैं जो एक साल झेल लेंगे। बाकी 50% के लिए मुश्किल घड़ी है।

परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर की आर्थिक पैकेज की मांग
ऑल इंडिया ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑटो रिक्शा टैक्सी यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि देशभर में 1.2 करोड़ ऑटो-टैक्सी रजिस्टर हैं। 40 दिन से लॉकडाउन है जिसमें इनकी स्थिति खराब हो गई है। टूरिस्ट स्थल वाले जम्मू-कश्मीर सहित अन्य शहरों की दशा तो डेढ़ से दो साल नहीं सुधरेगी। ऐसे में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर आर्थिक पैकेज की मांग की है। वहीं 30 जून तक केंद्र ने जो फिटनेस, लाइसेंस रिन्यू में जुर्माना माफ किया था वो बढ़ाकर 30 अक्टूबर तक करें। लंबित चालान माफ करें। सवारी नहीं मिलेगी तो फाइनेंसर को किश्त कहां से देंगे।

अनुमति तो सब हैंलेकिन फैक्ट्री खुल नहीं पा रही हैं
जनवरी, 2020 में भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर मंदी की मार से 65% कैपिसिटी पर चल रहा था। इस समय अनुमति तो सब है लेकिन फैक्ट्री खुल नहीं पा रही है। ओखला, नारायणा, नोएडा जैसे शहरों की स्मॉल व मीडियम स्केल की फैक्ट्री जब तक नहीं खुलेंगी, हालात नहीं सुधरेंगे। अभी बारिश का सीजन मारेगा। यानी अक्टूबर तक तो हालात ज्यादा खराब रहेंगे। फैक्ट्री खुलने में टाइम लगेगा क्योंकि उनके पास इतना पैसा नहीं है।
- एसपी सिंह, सीनियर फेलो, इंडिया फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग



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Transport sector running 10-15% of capacity, will take 2 years to get back on track


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