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Sunday, April 26, 2020

24 घंटे में सिर्फ 4 पूड़ी मिल रही थीं, मजबूर होकर घरों से मंगाए पैसे, साइकिलें खरीदकर 70 मजदूर चल पड़े बिहार

प्रशासन लाख दावा करे लेकिन हकीकत यह है कि लॉकडाउन में अधिकांश प्रवासी मजदूरों को भर पेट भोजन नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि अब वह किसी न किसी तरह से अपने घर जाने के लिए बेताब हैं। जिससे पेटभर भोजन मिल सके। शनिवार रात पृथला से वापस फरीदाबाद भेजे गए करीब 70 प्रवासी मजदूरों ने पुलिस के सामने प्रशासन के दावों की पोल खोली। बोले 24 घंटे में चार पूड़ी मिलती हैं। कैसे जिंदा रहेंगे। मजबूरी में घर से गाय-भैंस बेचकर पैसे मंगाए और साइकिलें खरीदकर घर जा रहे हैं ताकि भूखे तो नहीं मरेंगे। इन मजदूरों की यह जुबानी प्रशासन और सरकार को आईना दिखाने के लिए काफी है। आखिर में पुलिस अधिकारी ने मजदूरों को सांत्वना दिया कि सरकार उनके खाने की पर्याप्त व्यवस्था कर रही है। यदि किसी प्रकार की दिक्कत है तो 100 नंबर पर फोन कर मदद मांगना। तुम्हारे खाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
पुलिस के डर से रात को निकले थे, फिर भी पकड़े गए
ओल्ड फरीदाबाद के गढ़ी मोहल्ला में सैकड़ों की संख्या में बिहार के जमुई जिले के प्रवासी मजदूर रहते हैं। लॉकडाउन लागू होने के कारण कामकाज बंद है। इन मजदूरों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया। कमरे पर जो कुछ पैसा बचाकर रखे थे वह भी खत्म हो गया। अब कोई रास्ता नहीं बचा था कि वह अपने गांव जा सकें। प्रशासन की ओर से जो मदद मिल रही है वह इतनी कम है कि उनका पेट तक नहीं भर रहा है। प्रवासी मजदूर बजरंगी यादव, भोला यादव, सोनू, राम खिलावन, महेश कुमार आदि के अनुसार 24 घंटे में एक बार भोजन मिलता है। उसमें भी सिर्फ 4-5 पूड़ी होती है। इस तरह आधा पेट खाकर कब तक जिंदा रहेंगे। परेशान होकर शनिवार देर रात करीब 70 मजदूर बिहार के जमुई जिले के लिए साइकिल से निकल पड़े लेकिन पृथला के पास पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और वापस फरीदाबाद भेज दिया।

गाय-भैंस बेचकर घर से मंगाए पैसे, फिर खरीदी साइकिल
प्रवासी मजदूरों ने बताया कि 12-15 मजदूरों को छोड़कर किसी के पास साइकिल नहीं थी। ट्रेन व बस सेवाएं बंद हैं। ऐसे में घर जाना संभव नहीं था। इसलिए घर फोन कर पैसे मंगाए। किसी ने गाय बेची तो किसी ने भैंस। इसके बाद यहां पैसा भेजा। बैंक से पैसे निकालकर नई साइकिलें खरीदीं और फिर शनिवार रात फरीदाबाद से करीब 1200 किलोमीटर दूर जमुई के लिए निकल पड़े। करीब 21 किलोमीटर की दूरी तय कर पृथला तक पहुंच गए थे। तभी रास्ते में पुलिस उनके सामने रोड़ा बनकर पहुंच गई।

पुलिस ने समझाकर रात को ही सभी को भेज दिया वापस
रात करीब 8.15 बजे गदपुरी पुलिस ने प्रवासियों को रोक लिया। प्रवासियों ने गदपुरी थाने के इंस्पेक्टर अनिल कुमार से अपनी समस्या बताई और गांव जाने के लिए गुजारिश की। लेकिन इंस्पेक्टर ने लॉकडाउन लागू होने का हवाला देकर आगे जाने से मना कर दिया। इंस्पेक्टर ने सभी को चाय पिलाई। फिर उन्हें वापस फरीदाबाद की ओर रवाना कर दिया। इंस्पेक्टर ने प्रवासी मजदूरों से कहा कि सरकार तुम्हारे खाने व पीने की पूरी व्यवस्था कर रही है। आपको दुखी नहीं होना है। और न ही इस तरह भागना है।

पहले भी सैकड़ों की संख्या में लोग कर चुके पलायन
इसके पहले भी प्रवासी मजदूर प्रशासन की संवेदनहीनता से परेशान होकर साइकिल व रिक्शों से रवाना हो चुके हैं। कुछ दिन पहले पंजाब से करीब 22-25 मजदूर पलवल तक पहुंच गए थे। सोशल एक्टिविस्ट एवं पद्मश्री डॉ. ब्रह्मदत्त का कहना है कि इससे बड़ा अन्याय क्या होगा कि प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार और प्रशासन खाने तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। पैसे वालों के लिए तो बसें और हवाई जहाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन जिसके बल पर वह सत्तासीन होते हैं संकट में उन्हें ही भूल जा रहे हैं।



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फरीदाबाद। पृथला तक पहंुच गए प्रवासी मजदूरों को समझाते पुलिस अधिकारी।


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